: भारत शांति और सद्भावना का देश : प्रतीक सागर महाराज

Admin Wed, Nov 1, 2023

क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज ने नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर प्रांगण पोस्ट ऑफिस बजरिया में समाज को आगाह करते हुए कहा कि धर्म की रक्षा ही तुम्हारी ही रक्षा है

भिंड - संवाददाता

भारत देश शांति और सद्भावना का देश है मगर इस देश में कुछ राजनेता अपने स्वार्थ को सिद्ध करने के लिए हिंदू और जैनो को उद्वेलित कर के आपस में लड़ने का कार्य कर रहे हैं। 28 अक्टूबर को गुजरात जूनागढ़ में बीजेपी के पूर्व सांसद महेश गिरी द्वारा यही प्रयास किया गया। गिरनार सिद्ध क्षेत्र जहां पर भगवान नेमिनाथ ने निर्माण को प्राप्त किया इस नेमिनाथ पर्वत पर वंदना करने के लिए अगर कोई दिगंबर मुनि जाता है तो उसका सर धड़ से अलग कर दिया जाएगा यह चेतावनी सिर्फ रे संसद के द्वारा दी गई है। यह अहिंसक समाज सदियों से दूसरों की जान बचाने में अपनी जान कुर्बान करता आया है जिस समाज के साधु जो हमेशा अत्याचार करने वालों को क्षमा का दान देते आए हैं उन साधुओं के प्रति इतनी दुर्भावना पूर्ण वचनों का उपयोग करना क्या यह लोकतंत्र की मर्यादा का हनन नहीं है?, राहुल गांधी अगर नरेंद्र मोदी के ऊपर कोई बयान दे देते हैं तो वह मान हानि का दवा उनके ऊपर ठोक दिया जाता है वही दिगंबर जैन मुनि जो संपूर्ण राष्ट्र की धरोहर है उनके ऊपर इस तरह का बयान देना क्या मानहानि का केस नहीं है किसी धर्मगुरु के साथ में अभद्रता पूर्ण व्यवहार लोकतंत्र की हत्या है। क्रांतिवीर मुनि श्री प्रतीक सागर जी महाराज ने नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर प्रांगण पोस्ट ऑफिस बजरिया में समाज को आगाह करते हुए कहा कि धर्म की रक्षा ही तुम्हारी ही रक्षा है अगर तुम धर्म की रक्षा नहीं कर सके तो तुम्हारी रक्षा कौन करेगा। जैन समाज शांतिप्रिया समाज है मगर महावीर स्वामी ने चार तरह की हिंसाओं का उल्लेख जैन ग्रंथों में किया है जिसमें एक हिंसा है विरोधी हिंसा जिसमें कहा गया है अपने परिवार के ऊपर, देश के ऊपर, धर्म के ऊपर आपत्ती आने पर उसे बचाने के लिए शस्त्र उठाना पड़े तो उसे उठाने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। भारतीय संविधान में सेल्फ डिफेंस की व्यवस्था दी गई है जो कानून है। अब समय आ गया है जैन समाज को गुलामी की जंजीर तोड़कर अपने राज्य धर्म को निभाये हम हिंदू और जैनो कि पूजा पद्धतियों के मामले में अलग-अलग है मगर धर्म के अधिकारों में एक समान है। मर्यादा पुरुषोत्तम राम ने कभी किसी धर्म का पुरस्कार नहीं किया कभी किसी धर्म पर उपद्रव हुआ उन ने सामने आकर उससे बचाया है। आज कुछ लोग रामराज्य और हिंदू राष्ट्र की मांग करते हैं मगर उन के अंदर रावण रावण पल रहा है। दूसरे धर्म का तिरस्कर करने बाला किसी भी धर्म का भक्त नहीं हो सकता है यह काम कोई राष्ट्रद्रोही और धर्म द्रोही व्यक्ति हि कर सकता है। गिरनार पर्वत केवल एक मिट्टी का टीला नहीं है वह आस्थाओं का शिखर है। और उसके साथ राजनीतिकरण करना अपनी दूषित मानसिकता का परिचय है। पूर्व सांसद महेश गिरी को जैन समाज से माफी मांगना चाहिए और अपने शब्दों को वापस लेना चाहिए। नहीं तो संपूर्ण भारतवर्ष का जैन समाज एक बार फिर रोड पर उतरकर वह काम करेगा जो आज तक नहीं किया।
मैं जैन संत होने के नाते हिंसा के मार्ग को अपनाने की बात तो नहीं करूंगा मगर विरोधी हिंसा को अपनाने की बात जरूर कहूंगा। तुम्हारी शांति को लोग अगर कायरता समझने लग जाए। तो तुम्हें भी बता देना चाहिए कि हम कायरों की संतान नहीं हमसे शेरों की संतान है। जुल्म करना पाप है मगर जुल्म सहना उससे भी बड़ा पाप है।
संपूर्ण भारतवर्ष के धर्म गुरुओं का अव्वाहन करता हूं कि वह अपने निजी स्वार्थ का परित्याग करते हुए भारत की संस्कृति को अक्षुण्ण बनाए रखने में अपना सहयोग प्रदान करें। समाज का आदर्श होते हैं उन्हें ऐसा आदर्श प्रस्तुत किया जाना चाहिए जैसा आदर्श नारायण श्री कृष्ण ने अर्जुन को कुरुक्षेत्र में खड़े होकर प्रस्तुत किया था और कहा था कि आप के साथ चलने वाला तुम्हारा सगा संबंधी नहीं अपितु तुम्हारा दुश्मन है वही बात सभी धर्म गुरुओं को चाहिए कि किसी भी धर्म के साथ कोई छेड़छाड़ करें तो हम सब मिलकर उसको मुंहतोड़ जवाब दें और भारत की संस्कृति और संस्कारों का सम्मान कर बाये।

विज्ञापन

जरूरी खबरें